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कर्नाटक विधानसभा ने पश्चिमी घाट में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों पर कस्तूरीरंगन रिपोर्ट को सर्वसम्मति से खारिज किया

25 September 2026
4 min read
The Karnataka Legislative Assembly has unanimously rejected the Kasturirangan Report concerning the demarcation of Ecologically Sensitive Areas in the Western Ghats. Lawmakers raised serious concerns regarding outdated satellite data and the potential displacement of local farming communities.

मुख्य बिंदु (Key Highlights)

  • कर्नाटक विधानसभा ने पश्चिमी घाट क्षेत्र के निवासियों के लिए गंभीर आर्थिक और आजीविका संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए कस्तूरीरंगन रिपोर्ट को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया है।
  • प्रमुख शिकायतों में प्राकृतिक परिदृश्यों को मानव-प्रधान क्षेत्रों से अलग करने के लिए 2012 के पुराने रिमोट-सेंसिंग और उपग्रह डेटा का उपयोग शामिल है।
  • इस बात पर चिंता जताई गई कि यदि किसी राजस्व ग्राम का कम से कम 20% हिस्सा संवेदनशील माना जाता है, तो पूरे गांव को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) के तहत रखा जाएगा।
  • खनन प्रतिबंधों और विस्थापन की आशंकाओं के कारण द्विपक्षीय राजनीतिक विरोध और स्थानीय प्रतिरोध ने राज्य में ESA ढांचे के कार्यान्वयन को लगातार बाधित किया है।

परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Facts)

मंत्रालय / विभाग

Ministry of Environment, Forest and Climate Change (MoEFCC)

संबंधित संस्थाएं

Karnataka Legislative Assembly, High Level Working Group (HLWG) chaired by K. Kasturirangan

संवैधानिक / कानूनी संदर्भ

Environment (Protection) Act, 1986

स्टैटिक जीके संदर्भ

The Western Ghats span across six states: Gujarat, Maharashtra, Goa, Karnataka, Kerala, and Tamil Nadu, and are recognized as a UNESCO World Heritage Site and a global biodiversity hotspot.

विस्तृत संपादकीय एवं मुख्य परीक्षा विश्लेषण

कर्नाटक विधानसभा ने पश्चिमी घाट में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के सीमांकन से संबंधित कस्तूरीरंगन रिपोर्ट को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया है। विधायकों ने पुराने उपग्रह डेटा और स्थानीय कृषक समुदायों के संभावित विस्थापन को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं। कर्नाटक विधानसभा ने पश्चिमी घाट क्षेत्र के निवासियों के लिए गंभीर आर्थिक और आजीविका संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए कस्तूरीरंगन रिपोर्ट को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया है। प्रमुख शिकायतों में प्राकृतिक परिदृश्यों को मानव-प्रधान क्षेत्रों से अलग करने के लिए 2012 के पुराने रिमोट-सेंसिंग और उपग्रह डेटा का उपयोग शामिल है। इस बात पर चिंता जताई गई कि यदि किसी राजस्व ग्राम का कम से कम 20% हिस्सा संवेदनशील माना जाता है, तो पूरे गांव को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) के तहत रखा जाएगा। खनन प्रतिबंधों और विस्थापन की आशंकाओं के कारण द्विपक्षीय राजनीतिक विरोध और स्थानीय प्रतिरोध ने राज्य में ESA ढांचे के कार्यान्वयन को लगातार बाधित किया है।

अभ्यास प्रश्न (Daily Practice MCQs)

विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (SSC, Banking, UPSC) के स्तर अनुसार बहुविकल्पीय प्रश्न

3 Questions
Level 1: Direct Factual (SSC / Railways)

Q1.पश्चिमी घाट के संरक्षण के लिए नियुक्त समितियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गाडगिल समिति रिपोर्ट को पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल (WGEEP) के रूप में भी जाना जाता है। 2. कस्तूरीरंगन समिति को WGEEP रिपोर्ट की जांच के लिए उच्च स्तरीय कार्य समूह के रूप में गठित किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

Level 2: Conceptual Bridge (Banking / State PSC)

Q2.भारत में निम्नलिखित में से किस विधिक ढांचे के तहत पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ESAs) को सामान्यतः नामित और अधिसूचित किया जाता है?

Level 3: Multi-Statement (UPSC / State PCS)

Q3.पश्चिमी घाट पर्वत श्रृंखला कितने भारतीय राज्यों से होकर गुजरती है?