CA-20260925-9873High Exam Priority
नारायण देवासी ने डीएनटी विकास बोर्ड के शासी निकाय के सदस्य के रूप में कार्यभार संभाला
25 September 2026
4 min read
Source:PIB India (Press Information Bureau)
श्री नारायण देवासी ने विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के विकास एवं कल्याण बोर्ड (डीडब्ल्यूबीडीएनसी) के शासी निकाय के सदस्य के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। यह उच्च स्तरीय नियुक्ति देश भर के हाशिए पर मौजूद घुमंतू समूहों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण और कल्याणकारी पहलों में तेजी लाने के उद्देश्य से की गई है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- इस नियुक्ति को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत कार्यरत सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग द्वारा अधिकृत किया गया है।
- विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के विकास एवं कल्याण बोर्ड (डीडब्ल्यूबीडीएनसी) के शासी निकाय में शामिल सदस्यों का मानक कार्यकाल तीन वर्ष या अगले प्रशासनिक आदेश तक (जो भी पहले हो) होता है।
- यह बोर्ड विशेष रूप से व्यवस्थित सामाजिक-आर्थिक वंचना का निदान करने और डीएनटी आबादी के लिए लक्षित कल्याणकारी नीतियां तैयार करने हेतु नोडल प्रशासनिक तंत्र के रूप में कार्य करता है।
- इसी महीने की शुरुआत में श्री स्वरूप सिंह बंजारा को भी डीडब्ल्यूबीडीएनसी के शासी निकाय के सदस्य के रूप में शामिल किया गया था, जो चल रहे प्रशासनिक विस्तार और संस्थागत सुदृढ़ीकरण को दर्शाता है।
परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Facts)
मंत्रालय / विभाग
Ministry of Social Justice and Empowerment (सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय)
संबंधित संस्थाएं
Development and Welfare Board for Denotified, Nomadic, and Semi-Nomadic Communities (DWBDNC), Department of Social Justice and Empowerment
संवैधानिक / कानूनी संदर्भ
Articles 14, 15, 16, and 38 of the Constitution of India (Directive Principles of State Policy on Social Justice and Welfare of Weaker Sections)
स्टैटिक जीके संदर्भ
Previous commissions constituted for DNT welfare include the Idate Commission (2014) and Renke Commission (2008), which laid the groundwork for targeted affirmative action and institutional boards.
विस्तृत संपादकीय एवं मुख्य परीक्षा विश्लेषण
विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों (डीएनटी) की कमजोरियों को दूर करने वाले संस्थागत ढांचे की उत्पत्ति ऐतिहासिक नीतिगत भूलों से जुड़ी है, जहां औपनिवेशिक काल के दौरान विभिन्न समुदायों को अनुचित रूप से आपराधिक कानूनों के दायरे में रख दिया गया था। स्वतंत्रता के बाद, रेणुके आयोग और इदाते आयोग जैसे क्रमिक आयोगों ने इन समूहों द्वारा सामना किए जाने वाले तीव्र सामाजिक-आर्थिक बहिष्करण, शैक्षिक पिछड़ेपन और बुनियादी नागरिक सुविधाओं के अभाव को रेखांकित किया। इस संरचनात्मक कमी को पाटने के लिए, केंद्र सरकार ने इन हाशिए के वर्गों तक लक्षित नीतिगत हस्तक्षेप, बजटीय आवंटन और कल्याणकारी योजनाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विशेष संस्थागत तंत्र स्थापित किए।
विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के विकास एवं कल्याण बोर्ड (डीडब्ल्यूबीडीएनसी) डीएनटी की अनूठी जीवन शैली और व्यावसायिक पैटर्नों के अनुकूल कल्याणकारी ढांचों को तैयार करने, उनकी निगरानी करने और उन्हें क्रियान्वित करने के लिए एक समर्पित निकाय के रूप में कार्य करता है। मुख्यधारा के अनुसूचित समूहों के विपरीत, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू आबादी के पास अक्सर स्थायी आवासीय दर्जा नहीं होता है, जिससे निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, औपचारिक ऋण और कल्याणकारी अधिकारों तक पहुंच बेहद कठिन हो जाती है। शासी निकाय में विषय विशेषज्ञ और जन प्रतिनिधि शामिल होते हैं जिनकी प्राथमिक जिम्मेदारी जमीनी हकीकत और केंद्रीय नीति निर्माण के बीच की खाई को पाटना है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि डीएनटी के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए योजना (SEED) जैसी कल्याणकारी योजनाएं जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से पहुंच सकें।
श्री नारायण देवासी जैसी रणनीतिक नियुक्तियों के माध्यम से शासी निकाय को मजबूत करना जमीनी स्तर पर संपर्क को पुनर्जीवित करने और कार्यान्वयन संबंधी बाधाओं को दूर करने के प्रशासनिक इरादे का संकेत देता है। एक समष्टि आर्थिक और सामाजिक नीति के दृष्टिकोण से, औपचारिक विकासात्मक प्रतिमान में डीएनटी का प्रभावी एकीकरण समावेशी विकास प्राप्त करने और अनुच्छेद 14, 15 और 38 के तहत सामाजिक न्याय के संवैधानिक जनादेश को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण है। आगे चलकर, बोर्ड को सब्सिडी, शैक्षिक छात्रवृत्ति और स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की फुल-प्रूफ लक्ष्यीकरण सुनिश्चित करने के लिए डीएनटी के लिए एक अद्यतन, व्यापक सामाजिक-आर्थिक जाति और समुदाय जनगणना आयोजित करने की निरंतर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जिससे नीतिगत घोषणाओं को ठोस कल्याणकारी परिणामों में बदला जा सके।
Official Reference:PIB India (Press Information Bureau)