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एसबीआईकैप्स को हैदराबाद मेट्रो फेज-आई अधिग्रहण के लिए 13,500 करोड़ रुपये का ऋण जुटाने में आ रही बाधाएं
25 September 2026
4 min read
The Telangana government's plan to take over the Hyderabad Metro Rail Phase-I has hit a roadblock as financial institutions are hesitant to provide a ₹13,500 crore loan at the low interest rates sought by the state. Consequently, the proposed ₹38,595 crore Phase-II expansion is also facing severe delays.
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- एसबीआईकैप्स हैदराबाद मेट्रो रेल (HMR) फेज-I के सरकारी अधिग्रहण के लिए आवश्यक 13,500 करोड़ रुपये के ऋण को अंतिम रूप देने में विफल रहा है।
- ऋणदाता तेलंगाना सरकार द्वारा मांगी गई कम ब्याज दरों पर धन उपलब्ध कराने में आनाकानी कर रहे हैं।
- 69.2 किलोमीटर लंबी एचएमआर फेज-I परियोजना मूल रूप से लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत बनाई गई थी।
- फेज-I के अधिग्रहण में देरी के कारण 38,595 करोड़ रुपये की अनुमानित 122.9 किलोमीटर लंबी फेज-II विस्तार योजना भी ठप पड़ गई है।
परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Facts)
मंत्रालय / विभाग
Government of Telangana (Municipal Administration and Urban Development Department)
संबंधित संस्थाएं
SBI Caps, Larsen & Toubro (L&T), IDBI Capital, DMRC International
संवैधानिक / कानूनी संदर्भ
Public-Private Partnership (PPP) framework governed under central and state infrastructure development policies.
स्टैटिक जीके संदर्भ
The Hyderabad Metro Rail is recognized as the world's largest metro rail project in PPP mode for a single phase.
विस्तृत संपादकीय एवं मुख्य परीक्षा विश्लेषण
तेलंगाना सरकार की हैदराबाद मेट्रो रेल फेज-आई के अधिग्रहण की योजना में बाधा आ गई है, क्योंकि वित्तीय संस्थान राज्य द्वारा मांगे गए कम ब्याज दरों पर 13,500 करोड़ रुपये का ऋण देने में असमर्थता जता रहे हैं। परिणामस्वरूप, प्रस्तावित 38,595 करोड़ रुपये के फेज-II विस्तार कार्य में भी भारी देरी हो रही है।
एसबीआईकैप्स हैदराबाद मेट्रो रेल (HMR) फेज-I के सरकारी अधिग्रहण के लिए आवश्यक 13,500 करोड़ रुपये के ऋण को अंतिम रूप देने में विफल रहा है।
ऋणदाता तेलंगाना सरकार द्वारा मांगी गई कम ब्याज दरों पर धन उपलब्ध कराने में आनाकानी कर रहे हैं।
69.2 किलोमीटर लंबी एचएमआर फेज-I परियोजना मूल रूप से लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत बनाई गई थी।
फेज-I के अधिग्रहण में देरी के कारण 38,595 करोड़ रुपये की अनुमानित 122.9 किलोमीटर लंबी फेज-II विस्तार योजना भी ठप पड़ गई है।