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भारत और नीदरलैंड्स ने गुजरात की कलसर परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए
26 September 2026
4 min read
India and the Netherlands have signed two Tripartite Memorandums of Understanding (MoUs) to enhance technical cooperation for the Kalpasar Project in Gujarat. The collaboration focuses on advanced engineering, hydrological modeling, and climate-resilient water infrastructure.
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- भारत और नीदरलैंड्स ने गुजरात के खंभात की खाड़ी में स्थित कलसर परियोजना के लिए दो त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए।
- इस समझौते में केंद्रीय जल आयोग, गुजरात का कलसर विभाग और नीदरलैंड्स के संगठन डेल्टास (Deltares) तथा टीयू डे Delft शामिल हैं।
- प्रमुख फोकस क्षेत्रों में हाइड्रोलिक मॉडलिंग, तटीय इंजीनियरिंग, संरचनात्मक डिजाइन और जलवायु-सहिष्णु बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है।
- इस परियोजना का उद्देश्य नर्मदा, माही, धधार और साबरमती जैसी नदियों के पानी का उपयोग करके एक विशाल मीठे पानी की झील बनाना और सौराष्ट्र क्षेत्र में जल संकट को दूर करना है।
परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Facts)
मंत्रालय / विभाग
Ministry of Jal Shakti, Government of India
संबंधित संस्थाएं
Central Water Commission (CWC), Kalpasar Department (Govt of Gujarat), Deltares (Netherlands), TU Delft (Netherlands)
संवैधानिक / कानूनी संदर्भ
Bilateral technical cooperation and water resource management initiatives under international institutional partnerships.
स्टैटिक जीके संदर्भ
The Kalpasar Project, also known as the Gulf of Khambhat Project, aims to construct a massive barrage across the Gulf of Khambhat in Gujarat to form a freshwater reservoir and house a rail-road corridor with renewable energy generation.
विस्तृत संपादकीय एवं मुख्य परीक्षा विश्लेषण
भारत और नीदरलैंड्स ने गुजरात में कलसर परियोजना के लिए तकनीकी सहयोग बढ़ाने हेतु दो त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग का मुख्य केंद्र उन्नत इंजीनियरिंग, हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग और जलवायु-सहिष्णु जल बुनियादी ढांचा है।
भारत और नीदरलैंड्स ने गुजरात के खंभात की खाड़ी में स्थित कलसर परियोजना के लिए दो त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए।
इस समझौते में केंद्रीय जल आयोग, गुजरात का कलसर विभाग और नीदरलैंड्स के संगठन डेल्टास (Deltares) तथा टीयू डे Delft शामिल हैं।
प्रमुख फोकस क्षेत्रों में हाइड्रोलिक मॉडलिंग, तटीय इंजीनियरिंग, संरचनात्मक डिजाइन और जलवायु-सहिष्णु बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है।
इस परियोजना का उद्देश्य नर्मदा, माही, धधार और साबरमती जैसी नदियों के पानी का उपयोग करके एक विशाल मीठे पानी की झील बनाना और सौराष्ट्र क्षेत्र में जल संकट को दूर करना है।