प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने आईआईटी रुड़की में रुटैग 2.0 की तीसरी वार्षिक समीक्षा की अध्यक्षता की
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- रुटैग की कल्पना मूल रूप से 2003-04 में की गई थी और इसे प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (OPSA) द्वारा 2004 में स्थापित किया गया था, जिसका उद्देश्य प्रमुख तकनीकी संस्थानों और जमीनी स्तर की ग्रामीण आवश्यकताओं के बीच की खाई को पाटना था।
- वर्ष 2023 में शुरू किए गए उन्नत रुटैग 2.0 ढांचे ने अपना रणनीतिक ध्यान क्षेत्रीय हितधारक सहभागिता, प्रौद्योगिकी सत्यापन, व्यावसायीकरण, व्यवस्थित विस्तार और व्यापक ग्रामीण अपनाव पर केंद्रित किया है।
- इस समीक्षा बैठक में सभी सात राष्ट्रीय रुटैग केंद्रों के प्रधान अन्वेषकों, सह-अन्वेषकों और परियोजना टीमों ने एक साथ आकर प्रौद्योगिकी परिपक्वता स्तरों, मापनीय सामाजिक-आर्थिक परिणामों और भविष्य की रूपरेखा पर विचार-विमर्श किया।
- प्रौद्योगिकी खोज, क्षेत्र सत्यापन, परिनियोजन और संस्थागत सहयोग को सुव्यवस्थित करने के लिए नाबार्ड और ओपीएसए द्वारा संयुक्त रूप से विकसित आरएसवीसी-अमृत (RSVC-AMRIT) मंच पर विशेष प्रकाश डाला गया।
- विचार-विमर्श में इस बात पर जोर दिया गया कि परिपक्व प्रौद्योगिकियों को वहनीयता या स्थायित्व से समझौता किए बिना सरकारी सहायता प्राप्त विकास से आगे बढ़कर स्वतंत्र उद्यमों, उद्योगों और ग्रामीण आजीविका प्रणालियों द्वारा अपनाए जाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Facts)
Office of the Principal Scientific Adviser (OPSA) to the Government of India
Office of the Principal Scientific Adviser (OPSA), Indian Institute of Technology (IIT) Roorkee, National Bank for Agriculture and Rural Development (NABARD)
Promotes the Directive Principles of State Policy (DPSP) under Part IV of the Indian Constitution, specifically Article 38 (securing a social order for the promotion of welfare of the people) and Article 43 (promotion of cottage industries in rural areas).
RuTAG was conceptualized in 2003-04 by the Office of the PSA to provide technological support to rural areas. RuTAG 2.0 was launched in 2023 to enhance regional engagement, technology commercialization, and widespread grassroots adoption.