CA-20260926-9794High Exam Priority

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने आईआईटी रुड़की में रुटैग 2.0 की तीसरी वार्षिक समीक्षा की अध्यक्षता की

26 September 2026
4 min read
Source:PIB India (Press Information Bureau)
Principal Scientific Adviser Prof. Ajay Kumar Sood chaired the third annual review meeting of the Rural Technology Action Group (RuTAG) 2.0 projects at IIT Roorkee on September 24–25, 2026. The two-day session evaluated cumulative progress across all seven RuTAG centers, emphasizing real-world rural solutions and scalable technology deployment.

मुख्य बिंदु (Key Highlights)

  • रुटैग की कल्पना मूल रूप से 2003-04 में की गई थी और इसे प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (OPSA) द्वारा 2004 में स्थापित किया गया था, जिसका उद्देश्य प्रमुख तकनीकी संस्थानों और जमीनी स्तर की ग्रामीण आवश्यकताओं के बीच की खाई को पाटना था।
  • वर्ष 2023 में शुरू किए गए उन्नत रुटैग 2.0 ढांचे ने अपना रणनीतिक ध्यान क्षेत्रीय हितधारक सहभागिता, प्रौद्योगिकी सत्यापन, व्यावसायीकरण, व्यवस्थित विस्तार और व्यापक ग्रामीण अपनाव पर केंद्रित किया है।
  • इस समीक्षा बैठक में सभी सात राष्ट्रीय रुटैग केंद्रों के प्रधान अन्वेषकों, सह-अन्वेषकों और परियोजना टीमों ने एक साथ आकर प्रौद्योगिकी परिपक्वता स्तरों, मापनीय सामाजिक-आर्थिक परिणामों और भविष्य की रूपरेखा पर विचार-विमर्श किया।
  • प्रौद्योगिकी खोज, क्षेत्र सत्यापन, परिनियोजन और संस्थागत सहयोग को सुव्यवस्थित करने के लिए नाबार्ड और ओपीएसए द्वारा संयुक्त रूप से विकसित आरएसवीसी-अमृत (RSVC-AMRIT) मंच पर विशेष प्रकाश डाला गया।
  • विचार-विमर्श में इस बात पर जोर दिया गया कि परिपक्व प्रौद्योगिकियों को वहनीयता या स्थायित्व से समझौता किए बिना सरकारी सहायता प्राप्त विकास से आगे बढ़कर स्वतंत्र उद्यमों, उद्योगों और ग्रामीण आजीविका प्रणालियों द्वारा अपनाए जाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Facts)

मंत्रालय / विभाग

Office of the Principal Scientific Adviser (OPSA) to the Government of India

संबंधित संस्थाएं

Office of the Principal Scientific Adviser (OPSA), Indian Institute of Technology (IIT) Roorkee, National Bank for Agriculture and Rural Development (NABARD)

संवैधानिक / कानूनी संदर्भ

Promotes the Directive Principles of State Policy (DPSP) under Part IV of the Indian Constitution, specifically Article 38 (securing a social order for the promotion of welfare of the people) and Article 43 (promotion of cottage industries in rural areas).

स्टैटिक जीके संदर्भ

RuTAG was conceptualized in 2003-04 by the Office of the PSA to provide technological support to rural areas. RuTAG 2.0 was launched in 2023 to enhance regional engagement, technology commercialization, and widespread grassroots adoption.

विस्तृत संपादकीय एवं मुख्य परीक्षा विश्लेषण

ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्रवाई समूह (रुटैग) पहल एक महत्वपूर्ण संस्थागत सेतु का प्रतिनिधित्व करती है जो भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) जैसे शीर्ष शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों को ग्रामीण समुदायों के सामने आने वाली वास्तविक तकनीकी बाधाओं से जोड़ती है। दो दशक पहले स्थापित, रुटैग ने जमीनी स्तर पर शिल्पकारों, कृषि और सूक्ष्म-औद्योगिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए लगातार खुद को विकसित किया है। 2023 में रुटैग 2.0 की शुरुआत के साथ, परिचालन प्रतिमान को अलग-थलग प्रोटोटाइप निर्माण से बदलकर व्यापक क्षेत्रीय सहभागिता, कठोर प्रौद्योगिकी सत्यापन और निर्बाध व्यावसायिक विस्तार की ओर स्थानांतरित किया गया है। यह सुनिश्चित करता है कि वैज्ञानिक हस्तक्षेप शैक्षणिक प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहें बल्कि मजबूत, बाजार-तैयार और टिकाऊ ग्रामीण आजीविका उपकरणों में परिवर्तित हों। आईआईटी रुड़की में आयोजित तीसरी वार्षिक बैठक के दौरान, गतिविधियों के दायरे को बढ़ाने के बजाय तकनीकी हस्तक्षेपों के प्रभाव को गहरा करने पर विशेष जोर दिया गया। चर्चाओं में ग्रामीण परिवेश में लागत-प्रभावशीलता और गुणवत्ता, विश्वसनीयता, सुरक्षा तथा स्थायित्व के मानदंडों के बीच के नाजुक संतुलन को रेखांकित किया गया। इसके अलावा, नाबार्ड समर्थित आरएसवीसी-अमृत (RSVC-AMRIT) मंच जैसे वित्तपोषण और परिनियोजन तंत्रों का एकीकरण ग्रामीण प्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं विकास तथा बड़े पैमाने पर व्यावसायिक प्रसार के बीच की बाधाओं को पाटने के संस्थागत प्रयास को प्रदर्शित करता है। हितधारकों ने विभिन्न तकनीकी समाधानों की परिपक्वता का मूल्यांकन किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे व्यापक ग्रामीण मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत हों। लोक नीति और समावेशी विकास के दृष्टिकोण से, रुटैग 2.0 जैसी पहलें जमीनी स्तर पर आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के विजन को साकार करने में सहायक हैं। स्थानीय संसाधनों का लाभ उठाकर और ग्रामीण कारीगरों, किसानों तथा सूक्ष्म-उद्यमियों को सशक्त बनाकर, विकेंद्रीकृत प्रौद्योगिकी परिनियोजन ग्रामीण संकट और पलायन को कम करने में मदद करता है। हालांकि, अंतिम मील तक पहुंच, स्थानीय रखरखाव पारिस्थितिकी तंत्र और बाजार लिंकेज के मोर्चे पर चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। वैज्ञानिक निकायों, नाबार्ड जैसे वित्तीय संस्थानों और स्थानीय प्रशासन के बीच संस्थागत तालमेल को मजबूत करना इन बाधाओं को दूर करने और ग्रामीण भारत में दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

अभ्यास प्रश्न (Daily Practice MCQs)

विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (SSC, Banking, UPSC) के स्तर अनुसार बहुविकल्पीय प्रश्न

3 Questions
Level 1: Direct Factual (SSC / Railways)

Q1.सितंबर 2026 में रुटैग 2.0 परियोजनाओं की तीसरी वार्षिक समीक्षा बैठक कहां आयोजित की गई थी?

Level 2: Conceptual Bridge (Banking / State PSC)

Q2.ग्रामीण प्रौद्योगिकी खोज और परिनियोजन के लिए आरएसवीसी-अमृत (RSVC-AMRIT) मंच विकसित करने हेतु किस संस्थान ने प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के साथ सहयोग किया है?

Level 3: Multi-Statement (UPSC / State PCS)

Q3.ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्रवाई समूह (रुटैग) पहल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रुटैग की कल्पना मूल रूप से प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (OPSA) द्वारा की गई थी और इसे स्थापित किया गया था। 2. 2023 में शुरू किए गए रुटैग 2.0 में क्षेत्रीय सहभागिता, प्रौद्योगिकी व्यावसायीकरण और व्यापक जमीनी स्तर पर अपनाए जाने पर अधिक जोर दिया गया है। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?