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AIMRA ने 0.4% MDR शुल्क के विरोध में 2 अक्टूबर को 'नो यूपीआई डे' की घोषणा की
27 September 2026
4 min read
The All India Mobile Retailers Association has called for a 'No UPI Day' on October 2, 2026, to protest the newly introduced 0.4% Merchant Discount Rate on high-value digital transactions. This grassroots opposition highlights growing friction between small merchants and policymakers over the cost structure of digital public infrastructure.
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- नए घोषित ढांचे के तहत, सरकार ने 15 अक्टूबर से प्रभावी ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट-बाउंड UPI हस्तांतरण पर विशेष रूप से 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) अनिवार्य किया है।
- छोटे पैमाने के मोबाइल विक्रेताओं का अनुमान है कि देश भर में इससे लगभग ₹40 करोड़ मासिक और लगभग ₹500 करोड़ वार्षिक का unsustainable वित्तीय बोझ पड़ेगा।
- विरोध प्रदर्शन कर रहे व्यापारी गांधी जयंती पर प्रतीकात्मक रूप से अपने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस क्विक रिस्पांस (QR) कोड को काले कपड़े से ढकने और डिजिटल संग्रह को पूरी तरह रोकने की योजना बना रहे हैं।
- डिजिटल माध्यमों के जरिए ₹5 लाख से ₹30 लाख के बीच मासिक कारोबार करने वाले सूक्ष्म-रिटेलर प्रति माह ₹2,000 से ₹12,000 तक के तत्काल शुद्ध परिचालन घाटे का अनुमान लगा रहे हैं।
- जबकि व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) हस्तांतरण और कम मूल्य के लेनदेन इन शुल्कों से मुक्त हैं, उद्योग निकायों का तर्क है कि व्यापारियों के सामने आने वाली कटौतियां जमीनी स्तर पर डिजिटल अपनाए जाने को खतरे में डालती हैं।
परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Facts)
मंत्रालय / विभाग
Ministry of Finance (Department of Financial Services)
संबंधित संस्थाएं
National Payments Corporation of India (NPCI), Reserve Bank of India (RBI), All India Mobile Retailers Association (AIMRA)
संवैधानिक / कानूनी संदर्भ
Payment and Settlement Systems Act, 2007; Article 246 of the Constitution (Union List - Banking and Currency)
स्टैटिक जीके संदर्भ
The Unified Payments Interface (UPI) was developed by NPCI and launched in 2016, operating under the regulatory purview of the Reserve Bank of India.
विस्तृत संपादकीय एवं मुख्य परीक्षा विश्लेषण
₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाना भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव का प्रतीक है। अपनी शुरुआत के बाद से, यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) ने 'जीरो MDR' व्यवस्था पर प्रगति की है, जिसने उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों के लिए बाधाओं को दूर करके लेनदेन की मात्रा में भारी वृद्धि को उत्प्रेरित किया है। हालांकि, शून्य-लागत बुनियादी ढांचे को बनाए रखने से भुगतान सेवा प्रदाताओं (PSPs), बैंकों और फिनटेक मध्यस्थों पर भारी वित्तीय दबाव पड़ा है जो सर्वर क्षमता, साइबर सुरक्षा और नेटवर्क अपटाइम में भारी निवेश करते हैं। कैलिब्रेटेड MDR की सरकार की शुरुआत का उद्देश्य छोटे, दैनिक उपयोग के खुदरा लेनदेन को दंडित किए बिना अधिग्रहण करने वाले बैंकों के परिचालन ओवरहेड्स को सब्सिडी देना और डिजिटल भुगतान वास्तुकला की दीर्घकालिक स्थिरता को बनाए रखना है।