CA-20260927-8295High Exam Priority
संस्कृति मंत्रालय ने राजस्थान की विरासत को प्रदर्शित करते हुए पीएम मेमेंटोज़ ई-ऑक्शन 2026 का 8वां संस्करण लॉन्च किया
27 September 2026
4 min read
Source:PIB India (Press Information Bureau)
The Ministry of Culture has commenced the 8th edition of the PM Mementos E-Auction 2026, showcasing 37 exclusive artifacts celebrating Rajasthan's royal heritage, religious traditions, and folk culture. The public bidding window for these unique items remains active until October 2, 2026.
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- क्यूरेटेड कैटलॉग में पारंपरिक पिछवाई और फड़ पेंटिंग, शाही लकड़ी के अंबाबारी हाथी मॉडल और जटिल रूप से बुनी गई पगड़ियाँ शामिल हैं।
- संग्रह में शामिल प्रमुख आध्यात्मिक और ऐतिहासिक स्थलों में अजमेर शरीफ दरगाह, कैला माता मंदिर, बांसवाड़ा का मानगढ़ धाम और पुष्कर ब्रह्मा मंदिर शामिल हैं।
- संग्रह में पारंपरिक भालों से सुसज्जित लोक देवता वीर तेजाजी महाराज की चांदी की स्मृतियों और मूर्तिकला के रूपों पर विशेष जोर दिया गया है।
- आधिकारिक बोली विवरण, डिजिटल कैटलॉग पहुंच और पंजीकरण प्रक्रियाएं विशेष रूप से राष्ट्रीय पोर्टल pmmementos.gov.in पर उपलब्ध कराई गई हैं।
परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Facts)
मंत्रालय / विभाग
Ministry of Culture, Government of India
संबंधित संस्थाएं
National Gallery of Modern Art (NGMA), Archaeological Survey of India (ASI), Zonal Cultural Centres
संवैधानिक / कानूनी संदर्भ
Article 49 (Protection of monuments and places and objects of national importance) and Article 51A(f) (Duty to value and preserve the rich heritage of our composite culture) of the Constitution of India.
स्टैटिक जीके संदर्भ
Rajasthan folk art traditions include Pichwai paintings of Nathdwara, Phad paintings, and revered folk deities known as Panch Pirs and regional Lok Devtas like Veer Tejaji, Pabuji, and Ramdevji.
विस्तृत संपादकीय एवं मुख्य परीक्षा विश्लेषण
पीएम मेमेंटोज़ ई-ऑक्शन मंच गणमान्य व्यक्तियों द्वारा प्राप्त राष्ट्रीय उपहारों की सार्वजनिक प्रदर्शनी और मुद्रीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण संस्थागत तंत्र के रूप में कार्य करता है, जो पारदर्शिता और सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ावा देता है। अपने 8वें संस्करण में राजस्थान को केंद्र में रखकर, यह पहल जमीनी स्तर की स्वदेशी शिल्प कौशल को डिजिटल सार्वजनिक मंचों के साथ जोड़ती है, जिससे देश भर के उत्साही लोगों को सदियों पुरानी कलात्मक परंपराओं, वास्तुशिल्प रूपांकनों और आध्यात्मिक बहुलवाद का प्रतीक कलाकृतियां प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
परिचालन दृष्टिकोण से, क्यूरेटेड संग्रह मेवाड़ की शास्त्रीय लघु और कपड़ा कला रूपों से लेकर मारवाड़ की लोक-कथाओं तक विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को एकीकृत करता है। हस्तनिर्मित नाथद्वारा पिछवाई और भीलवाड़ा फड़ पेंटिंग जैसी वस्तुएं पीढ़ियों से चली आ रही संहिताबद्ध धार्मिक पौराणिक कथाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं, जबकि वास्तुकला लघु वस्तुएं राज्य की लकड़ी और वास्तुकला की विरासत को रेखांकित करती हैं। इसके अलावा, अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के फ़्रेमयुक्त संस्करणों जैसे समकालीन राष्ट्रीय मील के पत्थर से जुड़ी वस्तुओं को शामिल करना, जीवित लोक परंपराओं के साथ ऐतिहासिक निरंतरता को प्रासंगिक बनाता है।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (State PSCs) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के लिए, यह पहल भारतीय हस्तशिल्प, लघु चित्रकला शैलियों (मेवाड़, नाथद्वारा), क्षेत्रीय लोक देवताओं और मध्यकालीन व आधुनिक भारत में सामाजिक-धार्मिक समन्वय के संदर्भ में कला और संस्कृति पाठ्यक्रम से गहराई से जुड़ती है। ऐसे स्वदेशी संपर्नों को बढ़ावा देना न केवल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 49 और 51A(f) के तहत अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करता है, बल्कि संरचित राष्ट्रीय मान्यता और डिजिटल दृश्यता के माध्यम से स्थानीय कारीगर पारिस्थितिकी तंत्र को भी सशक्त बनाता है।
Official Reference:PIB India (Press Information Bureau)