CA-20260929-7850Exam Essential
भारत ने रोम में सीओएफओ 28 में वन एवं भू-दृश्य पुनर्स्थापन पहलों को प्रदर्शित किया
29 Sept 2026
4 min read
Source:PIB India (Press Information Bureau)
India showcased its significant achievements in forest and landscape restoration at the 28th session of the FAO Committee on Forestry (COFO 28) held in Rome. The country emphasized the need for nation-led implementation, capacity building, and accessible climate finance to achieve global sustainability goals.
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- सतत वनीकरण नीतियों के परिणामस्वरूप भारत का कुल वन और वृक्ष आवरण 8.274 करोड़ हेक्टेयर है, जो इसके कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 25.17 प्रतिशत है।
- एफएओ वैश्विक वन संसाधन आकलन 2025 के अनुसार, भारत कुल वन क्षेत्र के मामले में विश्व स्तर पर 9वें और शुद्ध वार्षिक वन क्षेत्र वृद्धि के मामले में तीसरे स्थान पर है।
- भारत ने 2021 तक 2.29 बिलियन टन CO₂ समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक सृजित किया है, और 2035 के अपने लक्ष्य को बढ़ाकर 3.5-4.0 बिलियन टन कर दिया है।
- बॉन चैलेंज के तहत, भारत ने 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर क्षरित भूमि को पुनर्स्थापित करने के अपने लक्ष्य में से 2.176 करोड़ हेक्टेयर भूमि को पहले ही दायरे में ला लिया है।
- अरावली ग्रीन वॉल, मैंग्रोव के लिए MISHTI पहल, रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 101 होना, और 'एक पेड़ माँ के नाम' जैसी प्रमुख घरेलू पहलों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया।
परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Facts)
मंत्रालय / विभाग
Ministry of Environment, Forest and Climate Change (MoEFCC)
संबंधित संस्थाएं
Food and Agriculture Organization (FAO), Committee on Forestry (COFO), CAMPA
संवैधानिक / कानूनी संदर्भ
Article 48A (Directive Principles of State Policy) and Article 51A(g) (Fundamental Duties) of the Constitution of India mandate the protection and improvement of the natural environment and forests.
स्टैटिक जीके संदर्भ
The Bonn Challenge is a global goal to bring 150 million hectares of degraded and deforested landscapes into restoration by 2020 and 350 million hectares by 2030.
विस्तृत संपादकीय एवं मुख्य परीक्षा विश्लेषण
रोम में खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) की वानिकी समिति के 28वें सत्र (सीओएफओ 28) में भारत की भागीदारी वैश्विक मंचों पर उसकी घरेलू पारिस्थितिक उपलब्धियों को प्रदर्शित करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। भारत का नीतिगत ढांचा एक विकेंद्रीकृत, भू-दृश्य-स्तरीय दृष्टिकोण पर केंद्रित है जो सतत वन प्रबंधन को स्थानीय वन-आश्रित समुदायों की सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं के साथ जोड़ता है। यह एकीकरण पेरिस समझौते के तहत भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) का आधार बनता है, जिसका उद्देश्य विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में हरित आवरण का विस्तार करते हुए दीर्घकालिक जलवायु लचीलापन बनाना है।
क्रियात्मक रूप से, भारत की सफलता राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तर पर फैली हुई एक बहु-आयामी संस्थागत तंत्र पर आधारित है। इसके मुख्य चालकों में धन के उपयोग के लिए प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (कैम्पा), जमीनी स्तर पर लामबंदी के लिए संयुक्त वन प्रबंधन समितियां, और हरित भारत के लिए राष्ट्रीय मिशन जैसे लक्षित मिशन शामिल हैं। मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए अरावली ग्रीन वॉल पहल, तटीय लचीलेपन के लिए MISHTI योजना और समुदाय-संचालित 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान जैसे प्रमुख तकनीकी हस्तक्षेप एक समावेशी 'संपूर्ण-समाज' शासन मॉडल को दर्शाते हैं जो नौकरशाही निष्पादन को जन आंदोलन के साथ जोड़ता है।
इन सराहनीय उपलब्धियों के बावजूद, संरचनात्मक चुनौतियां बनी हुई हैं, विशेष रूप से अनुमानित जलवायु वित्त, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और जैव विविधता के नुकसान के लिए निगरानी तंत्र से संबंधित। सीओएफओ 28 के दौरान, भारत ने विकासशील देशों के लिए संसाधन अंतर को पाटने के वास्ते मिश्रित वित्त तंत्र और एफएओ जैसी बहुपक्षीय एजेंसियों से बेहतर समर्थन की वकालत की। यूपीएससी अभ्यर्थियों के लिए, यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण कूटनीति, घरेलू नीति लक्ष्यों (जैसे 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करना) और रामसर कन्वेंशन तथा बॉन चैलेंज जैसे जैव विविधता संरक्षण ढांचों के बीच की कड़ी को उजागर करता है।
Official Reference:PIB India (Press Information Bureau)