CA-20260930-7849Exam Essential
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत मंडपम में यूपीएससी के शताब्दी समारोह का शुभारंभ किया; स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया
30 Sept 2026
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Source:PIB India (Press Information Bureau)
Prime Minister Narendra Modi attended the culmination of the year-long centenary celebrations of the Union Public Service Commission (UPSC) at Bharat Mandapam, New Delhi, marking 100 years of the institution's establishment. On this historic milestone, the Prime Minister released a commemorative coin, a special postage stamp, and a book detailing 100 landmark decisions of the commission.
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- भारत में लोक सेवा आयोग की स्थापना मूल रूप से 1 अक्टूबर, 1926 को 'रॉयल कमीशन ऑन द सुपीरियर सिविल सर्विसेज इन इंडिया' (जिसे 1923-24 के ली आयोग के नाम से जाना जाता है) की सिफारिशों पर की गई थी।
- इस संस्थान को बाद में भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत 'फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन' के रूप में पुनर्गठित किया गया था, और स्वतंत्रता के बाद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत इसका नाम बदलकर 'संघ लोक सेवा आयोग' (UPSC) कर दिया गया।
- विमोचित की गई पुस्तक 'भारत में यूपीएससी और लोक सेवा आयोगों की नीतियों को आकार देने वाले - 100 ऐतिहासिक निर्णय' भर्ती नीतियों के विकास, प्रशासनिक सुधारों और नागरिक सेवाओं को आकार देने वाले ऐतिहासिक न्यायिक निर्णयों का दस्तावेजीकरण करती है।
- इस दो दिवसीय कार्यक्रम (30 सितंबर - 1 अक्टूबर, 2026) में 'शताब्दी समारोह - मंथन' नामक एक विचार-मंथन सत्र शामिल था, जिसमें मानकीकृत भर्ती प्रथाओं और तकनीकी एकीकरण पर चर्चा करने के लिए राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSCs) के अध्यक्षों को एक मंच पर लाया गया।
परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Facts)
मंत्रालय / विभाग
Ministry of Personnel, Public Grievances and Pensions (Nodal Ministry for administrative matters)
संबंधित संस्थाएं
Union Public Service Commission (UPSC), State Public Service Commissions (SPSCs), Department of Personnel and Training (DoPT)
संवैधानिक / कानूनी संदर्भ
Articles 315 to 323 in Part XIV of the Constitution of India; Government of India Act, 1935; recommendations of the Lee Commission (1924).
स्टैटिक जीके संदर्भ
The Public Service Commission was first established on October 1, 1926, under the chairmanship of Sir Ross Barker. The Constitution of India under Article 315 provides for a Public Service Commission for the Union and a Public Service Commission for each State.
विस्तृत संपादकीय एवं मुख्य परीक्षा विश्लेषण
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) का शताब्दी वर्ष भारत के प्रशासनिक इतिहास में एक मील का पत्थर है। उच्च नागरिक सेवाओं के भारतीयकरण के लिए औपनिवेशिक काल के दौरान 1926 में स्थापित यह आयोग स्वतंत्र भारत के लोकतांत्रिक शासन के संस्थागत आधार स्तंभ के रूप में विकसित हुआ है। पिछले एक दशक में, यह ब्रिटिश शासन के तहत एक सीमित भर्ती निकाय से स्वतंत्र भारत में योग्यता प्रणाली के संवैधानिक प्रहरी के रूप में परिवर्तित हो गया है। वर्ष भर चलने वाले ये समारोह इस संस्था के लचीलेपन, अनुकूलन क्षमता और देश के "स्टील फ्रेम" के चयन में इसकी स्थायी भूमिका को रेखांकित करते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि प्रशासनिक नेतृत्व सक्षम, निष्पक्ष और भारत के विविध सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने का प्रतिनिधित्व करने वाला बना रहे।
संविधान के भाग XIV के अनुच्छेद 315 से 323 के तहत संवैधानिक रूप से स्थापित, यूपीएससी एक स्वतंत्र और स्वायत्त निकाय के रूप में कार्य करता है। इसका प्राथमिक अधिदेश संघ की सेवाओं में नियुक्तियों के लिए परीक्षाएं आयोजित करना और अनुशासनात्मक मामलों, पदोन्नति और स्थानांतरण नीतियों पर सरकार को सलाह देना है। शताब्दी समारोह, विशेष रूप से 'मंथन' सम्मेलन, लोक सेवा भर्ती के सहयोगात्मक संघीय ढांचे को रेखांकित करता है। राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSCs) के अध्यक्षों को एक साथ लाकर, इस कार्यक्रम ने भर्ती पद्धतियों के आधुनिकीकरण, सुरक्षित परीक्षाओं के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को शामिल करने और 'विकसित भारत @ 2047' के लक्ष्यों के साथ नागरिक सेवा दक्षताओं को संरेखित करने पर एक महत्वपूर्ण संवाद की सुविधा प्रदान की।
जैसे-जैसे भारत तीव्र आर्थिक विकास और शासन परिवर्तन का लक्ष्य रख रहा है, यूपीएससी के सामने पूर्ण सत्यनिष्ठा बनाए रखने के साथ-साथ तेजी से बदलते तकनीकी और प्रशासनिक परिदृश्य के अनुकूल होने की दोहरी चुनौती है। नीति निर्माण में लेटरल एंट्री (पार्श्व प्रवेश), तकनीकी व्यवधान और विशिष्ट डोमेन विशेषज्ञता की आवश्यकता जैसे मुद्दों के लिए आयोग को अपने परीक्षण मानकों में लगातार नवाचार करने की आवश्यकता है। 100 ऐतिहासिक निर्णयों पर स्मारक पुस्तक का विमोचन एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करता है, जो दर्शाता है कि आयोग ने अतीत में कानूनी और संरचनात्मक चुनौतियों का सामना कैसे किया है। आगे बढ़ते हुए, यूपीएससी को एक भविष्य-तैयार नौकरशाही के निर्माण के लिए निष्पक्षता और योग्यता के पारंपरिक मूल्यों को चपलता, डिजिटल सुरक्षा और विशिष्ट प्रतिभा अधिग्रहण की आधुनिक आवश्यकताओं के साथ संतुलित करना होगा।
Official Reference:PIB India (Press Information Bureau)