CA-20261001-8753Exam Essential
लोकसभा ने पूर्व अध्यक्ष जी.एम.सी. बालयोगी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की
1 Oct 2026
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Source:PIB India (Press Information Bureau)
Lok Sabha Speaker Om Birla led leaders and parliamentarians in paying floral tributes to former Lok Sabha Speaker G.M.C. Balayogi on his birth anniversary at the Central Hall of Samvidhan Sadan. The event commemorated his foundational contributions to parliamentary democracy, neutrality, and legislative dignity.
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- जी.एम.सी. बालयोगी ने 12वीं और 13वीं लोकसभा के कार्यकाल के दौरान लगातार लोकसभा अध्यक्ष के प्रतिष्ठित पद को संभाला था।
- कलाकार हिम चटर्जी द्वारा तैयार किए गए दिवंगत नेता के एक औपचारिक चित्र को संविधान सदन की बाहरी लॉबी में स्थायी रूप से स्थापित किया गया है।
- इस चित्र का अनावरण 10 फरवरी 2014 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा आधिकारिक रूप से किया गया था।
- राज्य सभा के उपसभापति सहित दोनों सदनों के महासचिवों ने इस स्मृति समारोह में भाग लिया और पुष्पांजलि अर्पित की।
परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Facts)
मंत्रालय / विभाग
Lok Sabha Secretariat / Ministry of Parliamentary Affairs
संबंधित संस्थाएं
Lok Sabha Secretariat, Rajya Sabha Secretariat
संवैधानिक / कानूनी संदर्भ
Article 93 of the Constitution of India (Election of Speaker and Deputy Speaker)
स्टैटिक जीके संदर्भ
The Speaker of the Lok Sabha casts a vote only in the case of an equality of votes (casting vote under Article 100(1)). The first Speaker of independent India was G.V. Mavalankar.
विस्तृत संपादकीय एवं मुख्य परीक्षा विश्लेषण
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष जी.एम.सी. बालयोगी का स्मरण भारत के संसदीय ढांचे के भीतर संस्थागत नेतृत्व और राजनीतिक निष्पक्षता की स्थायी विरासत को रेखांकित करता है। 1990 के दशक के उत्तरार्ध और 2000 के दशक के शुरुआती दौर के अस्थिर गठबंधन युगों के दौरान कार्य करते हुए, बालयोगी ने लोकतांत्रिक परंपराओं को बनाए रखने और अत्यधिक निष्पक्षता के साथ विभिन्न राजनीतिक दलों का प्रबंधन करने के लिए व्यापक प्रशंसा अर्जित की। विधायी कार्यवाही के एक स्वायत्त मध्यस्थ के रूप में लोकसभा अध्यक्ष के पद को मजबूत करने के लिए उनका कार्यकाल ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि बहस और विचार-विमर्श पक्षपातपूर्ण व्यवधानों से ऊपर रहें।
संस्थागत रूप से, लोकसभा अध्यक्ष भारतीय संवैधानिक योजना में एक केंद्रीय स्थान रखता है, जो लोकसभा के प्रमुख और उसके विशेषाधिकारों, प्रक्रियाओं और शिष्टाचार के मुख्य संरक्षक के रूप में कार्य करता है। संविधान का अनुच्छेद 93 सदन के सदस्यों में से एक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को अनिवार्य बनाता है। पदधारी व्यक्ति अनुच्छेद 110 के तहत धन विधेयकों को प्रमाणित करने और दसवीं अनुसूची में निहित दलबदल विरोधी कानून के कड़े प्रावधानों को प्रशासित करने सहित निर्णायक शक्तियों का प्रयोग करता है। बालयोगी जैसे नेताओं द्वारा छोड़ी गई विरासत समकालीन संसदीय प्रशासन के लिए एक मानक के रूप में कार्य करती है, जो एक मजबूत लोकतंत्र में द्विदलीय आम सहमति की आवश्यकता को उजागर करती है।
परीक्षा के दृष्टिकोण से, लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका, शक्तियों, चुनाव और निष्कासन से संबंधित प्रश्न सिविल सेवा और प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं। उम्मीदवारों को अध्यक्ष के पद की रक्षा करने वाले विशिष्ट संवैधानिक सुरक्षा उपायों को समझना चाहिए, जैसे कि कार्यकाल की सुरक्षा और अनुच्छेद 100(1) के तहत केवल टाई की स्थिति में इस्तेमाल किया जाने वाला निर्णायक मत। प्रतिष्ठित पूर्व पीठासीन अधिकारियों के कार्यकाल की अवधि और चित्र अनावरण जैसे ऐतिहासिक मील के पत्थर को याद रखना भारत के विधायी विकास के बारे में उम्मीदवार की वैचारिक स्पष्टता को समृद्ध करता है।
Official Reference:PIB India (Press Information Bureau)