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विश्व छात्र दिवस (डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जयंती)
2 Oct 2026
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विश्व छात्र दिवस पर एक विस्तृत ऐतिहासिक और अकादमिक विवरण, जो दूरदर्शी एयरोस्पेस वैज्ञानिक और भारत के 11वें राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के सम्मान में प्रतिवर्ष 15 अक्टूबर को मनाया जाता है।
विस्तृत संपादकीय एवं मुख्य परीक्षा विश्लेषण
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1. प्रारंभिक जीवन, आनुवंशिक पृष्ठभूमि एवं formative शिक्षा
- अवुल पाकिर जैनुलुद्दीन अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को ब्रिटिश भारत के मद्रास प्रेसीडेंसी के तत्कालीन रामनाथपुरम जिले के तीर्थ द्वीप शहर रामेश्वरम में एक तमिल मुस्लिम परिवार में हुआ था।
- उनके पिता जैनुलुद्दीन एक नाव के मालिक और स्थानीय मस्जिद के इमाम थे, जबकि उनकी माता अशीअम्मा एक गृहणी थीं। अत्यंत साधारण पृष्ठभूमि से आने के कारण, युवा कलाम ने अपने परिवार की आर्थिक सहायता के लिए शुरुआती वर्षों में समाचार पत्र वितरित किए।
- उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रामेश्वरम के श्वार्ट्ज हायर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की, जहाँ उन्हें गणित के प्रति गहरी रुचि रखने वाले एक जिज्ञासु छात्र के रूप में जाना जाता था।
- 1950 में, उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से संबद्ध सेंट जोसेफ कॉलेज, तिरुचिरापल्ली में प्रवेश लिया और 1954 में भौतिक विज्ञान में स्नातक (बी.एससी.) की डिग्री प्राप्त की।
- एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के प्रति तीव्र आकांक्षा के कारण, वे मद्रास चले गए और 1955 में प्रतिष्ठित मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में प्रवेश लिया, जहाँ से उन्होंने 1960 में एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की।
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2. कालानुक्रमिक सार्वजनिक समयरेखा एवं ऐतिहासिक आंदोलन
- 1958 में, कलाम ने नागरिक विमानन महानिदेशालय (DGCA) के तकनीकी केंद्र में वरिष्ठ वैज्ञानिक सहायक के रूप में अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की और बाद में 1960 में वैज्ञानिक के रूप में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) से जुड़े।
- 1963 में, उन्होंने वर्जीनिया के हैम्पटन में नासा के लैंगली रिसर्च सेंटर और मैरीलैंड के ग्रीनबेल्ट में गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर का दौरा किया, जिसने भारत के शुरुआती साउंडिंग रॉकेट विकास को अत्यधिक प्रभावित किया।
- 1969 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में स्थानांतरित होकर, उन्होंने भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (SLV-III) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में कार्य किया, जिसने 18 जुलाई 1980 को रोहिणी उपग्रह को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया।
- 1982 में निदेशक के रूप में डीआरडीओ लौटे, उन्होंने एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP) का नेतृत्व किया और अग्नि तथा पृथ्वी बैलिस्टिक मिसाइलों सहित महत्वपूर्ण रणनीतिक परिसंपत्तियों का सफल विकास किया।
- उन्होंने 1992 से 1999 तक प्रधानमंत्री के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार और डीआरडीओ के सचिव के रूप में कार्य किया तथा मई 1998 के पोखरण-द्वितीय परमाणु परीक्षण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
- उन्होंने 25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया और छात्रों तथा नागरिकों के बीच अपनी अद्वितीय पहुंच के कारण 'जनता के राष्ट्रपति' के रूप में लोकप्रिय हुए।
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3. साहित्यिक कृतियाँ, पत्रिकाएँ एवं स्थापित संस्थाएँ
- डॉ. कलाम ने कई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित आत्मकथात्मक और प्रेरणादायक पुस्तकें लिखीं, जिसकी शुरुआत 1999 में अरुण तिवारी के साथ सह-लेखन में रचित विंग्स ऑफ फायर से हुई।
- उनके अन्य महत्वपूर्ण साहित्यिक योगदानों में इंडिया 2020: ए विजन फॉर द न्यू मिनीडियम (1998), इग्नाइटेड माइंड्स (2002), टारगेट 3 बिलियन (2011), और गाइडिंग सोल्स (2005) शामिल हैं।
- एक संस्था निर्माता के रूप में, उन्होंने अपनी पुस्तक *इंडिया 2020* में आर्थिक और डिजिटल कनेक्टिविटी के माध्यम से ग्रामीण-शहरी विभाजन को पाटने के लिए PURA (Providing Urban Amenities in Rural Areas) फ्रेमवर्क की संकल्पना की।
- उन्होंने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, हैदराबाद के कुलधिपति और अन्ना विश्वविद्यालय में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के प्रोफेसर के रूप में अकादमिक और प्रशासनिक दायित्व निभाए।
- राष्ट्रपति कार्यकाल के पश्चात, उन्होंने अपना जीवन पूरी तरह से युवा मेंटरिंग के लिए समर्पित कर दिया और अहमदाबाद, इंदौर तथा शिलांग के भारतीय प्रबंधन संस्थानों (IIMs) सहित विभिन्न संस्थानों में व्याख्यान दिए।
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4. दार्शनिक मूल सिद्धांत एवं वैचारिक वास्तुकला
- डॉ. कलाम का दार्शनिक ढांचा आधुनिक वैज्ञानिक जिज्ञासा, आध्यात्मिक मानवतावाद और समझौताहीन राष्ट्रीय विकास के संश्लेषण पर आधारित था।
- उन्होंने 'जुड़े हुए अध्यात्म' (Engaged Spirituality) के सिद्धांत का समर्थन किया, जिसके अनुसार आध्यात्मिक उन्नति को समाज से दूर रहने के बजाय तकनीकी आत्मनिर्भरता और नैतिक अखंडता के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
- उनके शैक्षिक सुधार दृष्टिकोण ने शिक्षण के केंद्र को रटने की प्रवृत्ति से हटाकर रचनात्मकता, नवाचार, नैतिक नेतृत्व और उद्यमशीलता योग्यता पर केंद्रित करने पर बल दिया।
- अपने प्रशासनिक और सार्वजनिक नीतिगत संवादों में, उन्होंने लगातार युवा सशक्तिकरण की वकालत की और कहा कि युवाओं में चार आवश्यक गुण होने चाहिए: विजन की स्पष्टता, जुनून, कड़ी मेहनत और अटूट दृढ़ता।
- उन्होंने तकनीकी आधुनिकीकरण, कृषि आत्मनिर्भरता और सामाजिक कल्याण पर आधारित नैतिक शासन के माध्यम से 2020 तक एक विकसित भारत का सपना देखा था।
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5. वैश्विक स्मारक, स्मरणोत्सव एवं जीवंत विरासत
- भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलांग में एक व्याख्यान के दौरान 27 जुलाई 2015 को उनके अचानक निधन के पश्चात, भारत सरकार ने उनके गृह नगर रामेश्वरम के पेथैक्कराई में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम राष्ट्रीय स्मारक का निर्माण कराया।
- 2010 में, संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने उनकी 79वीं जयंती (15 अक्टूबर 2010) को आधिकारिक तौर पर विश्व छात्र दिवस के रूप में मान्यता दी, जिससे शिक्षा और युवा सशक्तिकरण के प्रति उनके आजीवन समर्पण को वैश्विक श्रद्धांजलि मिली।
- कलाम फैलोशिप और केरल में एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी सहित कई संस्थानों, सड़कों और शोध छात्रवृत्तियों का नाम उनके नाम पर रखा गया है।
- उनका जीवन अकादमिक समर्पण का एक स्थायी प्रतीक बना हुआ है, जो यह प्रमाणित करता है कि विनम्र पृष्ठभूमि मानव बौद्धिक और नैतिक प्राप्ति की ऊंचाइयों को सीमित नहीं कर सकती है।